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रैगिंग से कैसे बचें? रैगिंग विरोधी उपाय

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आज के इस लेख में हम जानेंगे कि रैगिंग क्या होती है और इससे बचने के लिए कौन-कौन से कानून हैं। यदि आपके साथ भी रैगिंग होती है तो आप उससे बचने के लिए क्या-क्या कानूनी प्रक्रिया अपना सकते हैं? रैगिंग क्या है?   रैगिंग की शुरुआत इसलिए हुई थी ताकि पुराने छात्र आने वाले नए छात्रों को सामान्य और दायरे में रहकर उनसे घुल मिल सकें और उन्हें अच्छा महसूस करा सकें। न कि किसी की भावनाओं को आहत करें। पर समय के साथ रैगिंग शब्द का अर्थ भी बदलने लगा जब पुराने छात्र ने छात्रों को अकारण रैगिंग के नाम पर गलत तरीके और व्यवहार से परेशान करना शुरू कर दिया।  तो अब हम कह सकते हैं कि - Anti-ragging affidivit format के लिए इस दिए गए लिंक पर क्लिक करें -- https://vidhikinfo.blogspot.com/2024/03/affidavit-for-anti-ragging-format-in.html किसी शिक्षण संस्थान, छात्रावास विश्वविद्यालय या किसी विद्यालय आदि में छात्रों के द्वारा ही किसी अन्य छात्र को प्रताड़ित करना या ऐसे किसी काम को करने के लिए जबरन मजबूर करना जो की वह किसी सामान्य स्थिति में नहीं करेगा, इसे ही रैगिंग कहते हैं। रैगिंग शारीरिक मानसिक या मौखिक रू...

CHARGE SHEET में कौन कौन से साक्ष्य मौजूद होते है ?

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  CHARGE SHEET में कौन कौन से साक्ष्य मौजूद होते है ? चार्जशीट में कई कालम होते है।  चार्जशीट  में आरोपियों के नाम, उनके द्वारा किए गए अपराध और विस्तृत जांच रिपोर्ट संलग्न होती है। यानी इसमें दो तरह के सबूतों का समावेश होता है। ORAL EVIDENCE और DOCUMENTARY EVIDENCE. ORAL EVIDENCE में गवाहों के बयान होते हैं, और DOCUMENTARY EVIDENCE में अपराध से संबंधित दस्तावेजों का समावेश चार्जशीट ( आरोप पत्र) में होता है। चार्जशीट पेश करने की प्रक्रिया क्या होती है? जब किसी व्यक्ति द्वारा पुलिस स्टेशन में किसी प्रकार की कोई शिकायत दर्ज की जाती है तो पुलिस उसका बयान लेती है और उसके बाद पुलिस अधिकारी को यह अधिकार होता है कि वह उस मामले में जांच बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के कर सकता है और घटनास्थल पर जाकर वहा मौज़ूद लोगों या आई विटनेस (चश्मदीद गवाह) का बयान भी ले सकता है। तो लिए गए बयान और उन सभी व्यक्तियों के स्टेटमेंट रिकॉर्ड करके पुलिस यह अनुमान लगाती है कि मामला चलाए जाने योग्य है या चलाए जाने योग्य नहीं है। यदि मामला चलाए जाने योग्य होता है तो बयान देने वाले व्यक्तियों को यदि आवश्यक हो ...

चार्जशीट (आरोप-पत्र) क्या है ? WHAT IS CHARGE SHEET IN HINDI ?

चार्जशीट क्या है ? WHAT IS CHARGE SHEET IN HINDI ? चार्जशीट, इसे हिंदी में आरोप-पत्र कहा जाता है। चार्जशीट(आरोप-पत्र) से संबंधित प्रवाधान दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा  173 में दिए गए हैं। सामान्य तौर पर किसी भी आपराधिक मामले में पुलिस को न्यायालय के समक्ष 90 दिनों के भीतर अपनी जांच पूरी कर चार्जशीट पेश करनी होती है। इसी के आधार पर न्यायालय आरोपी के विरुद्ध आरोप तय करता है या फिर आरोप निरस्त कर देता है। TAEKWONDO AND SELF DEFENSE CLASSES क्यों महत्वपूर्ण होती है चार्जशीट (आरोप-पत्र) ? Why is Charge Sheet important? जब भी कोई आपराधिक घटना घटित होती है तो सबसे पहले उस मामले की पुलिस थाने में  FIR  दर्ज की जाती है। FIR दर्ज हो जाने के बाद संबंधित मामले में जांच शुरू होती है और फिर पुलिस को कोर्ट में 90 दिनों के अंदर उस मामले से  संबंधित चार्जशीट दाखिल करनी होती है। यदि किसी कारण से जांच में अधिक समय लगता है तो पुलिस द्वारा 90 दिनों के बाद भी चार्जशीट दाखिल की जा सकती है, लेकिन ऐसी स्थिति में संबंधित मामले में आरोपी व्यक्ति जमानत (bail, बेल) का हकदार...